वृक्षो कि उदारता
एक बच्चा और एक पेड़ कि बहुत गहरी दोस्ती थी
बच्चा अपने कुछ दोस्तों के साथ रोज उस पेङ के पास आता था, और पेङ बङे प्यार से उसे आवाज देता,
आओ मेरे बच्चे मेरे पास आओ मेरी छाया मे मेरी मेटहनियों पर खेलो और मेरे स्वादिष्ट फलो को खाओ और बङी सरलता से ओ पेङ झुक कर अपनी सहमति देता था।
सभी बच्चे दिन भर उछल कूद करते और शाम होते ही बच्चे वापस अपने घर चले जाते हर रोज बच्चे आते ओर पेङ अपनी पुरानी बातों को दोहराता रहता,
आओ मेरे बच्चे मेरे पास आओ और मेरी छाया मे मेरी टहनियों पर खेलो, और फिर बच्चे खेलने मे लग जाते थे
दिन कब गुजर जाता था उनको पता भी नही चलता था
कुछ इस तरह से करके धीरे धीरे दिन गुजर रहे थे
वक्त गुजरता गया , और बच्चों का आना भी कम होता गया,
पर पेङ अब भी उसी बेताबी से उन बच्चों का इंतजार करता रहता
कुछ वक्त गुजरने के बाद बच्चों का आना बंद हो गया
पर पेङ आज भी उन रास्तों पर उनके आने के आहट को महसूस करता था
कुछ दिन बाद एक परेशान सा युवक आया और उस पेङ की छाया मे आराम करने लगा, ये वही बच्चा था जो पेड़ कि टहनियों पर खेलने आता था
पेङ बहुत खुश हो गया और अपनी बातो को दोहराते हुए बोला आओ मेरे बच्चे मेरी छाया मे आराम करो मेरे फलो को खाओ और मेरी टहनियों पर खेलो, पर उसकी बाते सुनने के बाद भी बच्चा खमोश रहा,
उसके बाद बच्चे ने बङी कङक आवाज मे कहा अब मै बच्चा नही बङा हो गया हू मुझे घर की जरूरत है मेरे पास पत्नी और बच्चे है अब मेरा गुजारा कैसे होगा,
पेङ ने कहा बस इतनी सी बात पर परेशान हो, आओ मेरे फलो को तोङ कर बेचो और मेरी लकङीयो से अपने घर को तैयार कर लो,
बच्चे ने ऐसा ही किया फलो को बेचने लगा और कुछ दिन बाद उसकी लकङीयो से अपने घर को तैयार किया और आराम से रहने लगा,
वक्त गुजरने के साथ अब उसे एहसास हो रहा था कि जिस मित्र ने मेरे लिए इतना कुछ किया उसके पास थोङी देर कुछ लम्हे ना गुजार पा रहे क्या हम इतने स्वार्थी है वह बच्चा जब कभी अकेला होता कुछ इस तरह से कोसता रहता था खुद को,
अब वह बच्चा बूढा हो चला था और बङा लम्बा समय हो गया था, अब बच्चा अपने जीवन से थक चला था,
फिर एक दिन हाथ मे एक छङी के सहारे बच्चा उस पेङ के पास पहुंचा, उसको देखकर मुरझाया हुआ बूढ़ा पेङ जो कि अब केवल तना बन कर रह गया था. वो उस बच्चे को देखकर खुश हो गया और बोला आओ मेरे बच्चे मेरे पास बैठो क्योंकि अब मेरे पास तुम्हें देने को कुछ नही है पर तुम मेरे कटे हुए सूखे तने पर बैठ कर आराम कर सकते हो
तब उस बच्चे ने कहा नही दोस्त आज हम कुछ मागने नही आये,बल्कि तुमसे मिलने आये है तुमसे बाते करने आये है,
तुमने मेरे लिए बहुत कुछ किया और हम इतने स्वार्थी कि तुमको कभी धन्यवाद भी न किया
आज मै तुम्हे धन्यवाद करता हू कि तुमने मेरे लिए बहुत कुछ किया, और फिर वह बच्चा भावुक हो जाता है
साथ ही बूढ़ा पेङ भी भावुक हो गया।
जीवन कि हर परिस्थितियों मे हम वृक्षो का उपयोग तो करते है पर इनके मूल्य को समझते हुए भी इनके अस्तित्व को खतरे झोकते चले जा रहे है
'' वृक्ष अवश्य लगाएं''
वृक्ष 🌳 वृक्ष 🌳 वृक्ष 🌳
@vt. 🙏